मनोरंजनमाँ – सुनील गुप्ताnewsadminMay 10, 2026May 10, 2026 by newsadminMay 10, 2026May 10, 2026047 ( 1 ) माँ प्रेम का अप्रतिम रूप., दिखे उसमें ईश्वरीय स्वरूप !! ( 2 ) माँ करे हर पूर्ण कामना., बना वो मेरा अनंत...
मनोरंजनआदर्श जीवन – जया भराड़े बड़ोदकर newsadminMay 9, 2026 by newsadminMay 9, 2026053 neerajtimes .com – सुबह-सुबह की ठंडी हवा आज बहुत सुकून दे रही थी। श्यामा ने रोज की तरह आज फिर घूमने निकल पड़ी थी। घर...
मनोरंजनजिज्ञासा – नीलांजनाnewsadminMay 9, 2026 by newsadminMay 9, 2026074 मानव जिज्ञासा ही वर्तमान परिणाम है। नित नए विश्व में करता अनुसन्धान है।। जिज्ञासा बीज है जिसमें वट वृक्ष समाया है। सम्पूर्ण जगत जिज्ञासा...
मनोरंजनपीपल की छाया – राजलक्ष्मी श्रीवास्तवnewsadminMay 7, 2026 by newsadminMay 7, 2026051 पीपल की छाया शीतल सुख देती, थकी हुई राहें यहाँ सुकून लेती। पत्तों की सरसर धुन मन हरती, धूप भी यहाँ आकर नरम पड़ती। जड़ों...
मनोरंजनधोखे का चेहरा – अविनाश श्रीवास्तवnewsadminMay 6, 2026 by newsadminMay 6, 2026058 चेहरे पर मुस्कान लिए, दिल में ज़हर छुपाए थे, हम उनको अपना समझे, वो खेल नए रचाए थे। बातों में मीठास बहुत थी, इरादे मगर...
मनोरंजनतुम्हें देखकर अंकुरित प्रणय – सुनील गुप्ताnewsadminMay 5, 2026May 5, 2026 by newsadminMay 5, 2026May 5, 2026057 ( 1 ) तुम्हें देखकर होए अंकुरित प्रणय ! बिना सोच समझकर…, हृदय से जा मिले हृदय !! ( 2 ) तुमसे मिलकर होए स्वयं...
मनोरंजनखिलता गुलाब – रेखा मित्तलnewsadminMay 4, 2026 by newsadminMay 4, 2026055 खिलता गुलाब वह खिलता गुलाब जो तुम अक्सर मेरे लिए लाया करते थे, जब हम दोस्त बने थे पता नहीं कैसे तुमसे कर लेती थी...
मनोरंजनज़िंदगी – रुचि मित्तलnewsadminMay 3, 2026 by newsadminMay 3, 2026070 मेरे पास किसी दर्पण की तरह नहीं आती वो तो खिड़की पर बैठे कबूतर सी हर सुबह मेरी उंगलियों से फिसल जाती है। मैं उसे...
मनोरंजनगर्मी का कहर – कर्नल प्रवीण त्रिपाठीnewsadminMay 3, 2026 by newsadminMay 3, 2026046 धक-धक धरती कर रही, गर्मी पड़े प्रचंड। मानव का नित तोड़ते, दिनकर रोज घमंड। भास्कर दें चेतावनी, बदलो अपनी राह, शुद्ध करो वातावरण, वरना पाओ...
मनोरंजनगाय माँ – अनमोल कुमारnewsadminMay 1, 2026 by newsadminMay 1, 2026062 गौ को माता कहकर पूजते हो, पर भूखी छोड़ सड़क पर क्यों? दूध पीकर लात मारते हो, बूढ़ी हो तो कत्लखाने क्यों? सुनो, गौ माता...