मनोरंजनमेरा स्वयं – सविता सिंहnewsadminApril 27, 2026 by newsadminApril 27, 202603 मैं और मेरे स्वयं की चलती अक्सर तनातनी। ना जाने क्यों कहती हमसे ना करना अब मनमानी। लिखने को कभी जो बैठे, कलम हठीली हो...
मनोरंजनमौन में अपने प्रणय को – अनुराधा पाण्डेयnewsadminApril 26, 2026 by newsadminApril 26, 202608 लो ! हुई अब मौन चितवन । एक रस अब मौन मेरे । जी करे तो ढूंढ लेना – #मौन में अपने प्रणय को……. बोलने...
मनोरंजनमजदूर दिवस – राजलक्ष्मी श्रीवास्तवnewsadminApril 25, 2026 by newsadminApril 25, 2026010 मिट्टी से उठकर सपने बुनता है पसीने से रोज़ रोटी वह चुनता धूप में जलकर भी मुस्कुराता रहता थककर भी जीवन को आगे बढ़ाता ईंटों...
मनोरंजनअस्त्तित्व – नीलांजना गुप्ताnewsadminApril 25, 2026 by newsadminApril 25, 2026011 अस्त्तित्व विलय तुझमे करलूँ, अपनी पहचान मिटा लू मैं। अर्जुन सा संशय त्याग कृष्ण, की गीता को अपना लू मैं। मैं बनू पितामह...
मनोरंजनरूमा (लघु कहानी) – जया भराड़े बड़ोदकरnewsadminApril 25, 2026 by newsadminApril 25, 2026015 neerajtimes.com – रूमा छोटी सी मासूम थी पांचवीं में पढ़ती थी मम्मी पापा नौकरी में व्यस्त थे । छोटा भाई तीन साल का था सोमू...
मनोरंजनकाली महाकाली – श्याम कुंवर भारतीnewsadminApril 25, 2026 by newsadminApril 25, 2026017 मां चरणों की धूल दे दो,गले माला अड़हुल फुल ले लो। दुख सब प्रतिकूल ले लो, मां समय अनुकूल दे दो। काली महाकाली मां तेरी...
मनोरंजनपुस्तक दिवस- सुनील गुप्ताnewsadminApril 23, 2026 by newsadminApril 23, 2026020 ( 1 ) पुस्तकें हमारी परम मित्र, आओ इनसे दोस्ती करें !! ( 2 ) पुस्तकें हैं सच्ची मार्गदर्शक, ये कभी न धोखा दें !!...
मनोरंजनग़ज़ल – रीता गुलाटीnewsadminApril 23, 2026 by newsadminApril 23, 2026021 कुछ दिल की आज यारा,अब तुम हमे सुनाओ। भीतर जमी है उलझन, उसको जरा मिटाओ। ठंडी हवा चले अब, शिकवा नही करो तुम। छोड़ो...
मनोरंजनधरती बचाओ – कर्नल प्रवीण त्रिपाठीnewsadminApril 22, 2026 by newsadminApril 22, 2026024 भारी संकट आन पड़ा है, धरती कौन बचायेगा। मानवता का नाम निशां तब, पृथ्वी से मिट जायेगा।1 बढ़ा प्रदूषण धरती पर यूं, जनता सारी त्रस्त...
मनोरंजनविश्व पर्यावरण दिवस – राजलक्ष्मी श्रीवास्तवnewsadminApril 22, 2026 by newsadminApril 22, 2026025 धरती ने आज पुकारा धीमे स्वर में, “मत छीनो मुझसे ये हरियाली अमर में।” सूखती नदियों की आँखें कहती कहानी, लौटा दो फिर से वो...