हाले-दिल अब ठीक-ठाक है,
मेरी नज़र आज भी पाक है।
उम्र भर रहा बे- गुनाह मगर,
दिल है जख्मी गिरेबां चाक है।
रहे मुफलिसी से वाबस्ता सदा,
और उनकी ज़माने में धाक है।
सदा रहा खामोश सामने उनके,
मगर वो तो बड़े ही बे-बाक है।
तर्ज़े-क़त्ल बड़ा ही रूहानी उनका,
तीरे-नज़र से मासूम दिल जाक है।
जो बनते थे सरकार-ए-आलम,
हुए खाकसार वो बाकि ख़ाक हैं।
रब ख्वाहिशे-निराश पे लगाम दे,
आजकल फ़िज़ा मेरे खिलाफ हैं।
– विनोद निराश, देहरादून
हाले-जिस्म – शरीर का स्थिति
पाक – पवित्र / शुद्ध
गिरेबां चाक – पागलपन / गहरे सदमे में / कॉलर फटा हुआ
मुफलिसी – गरीबी
वाबस्ता – संबंध / जुड़ा हुआ / सम्बद्ध
धाक – शोहरत / ख्याति / दबदबा
बे-बाक – खुलकर (निडर) बोलने वाला
तर्ज़े-क़त्ल – वध का तरीका / हत्या का ढंग
रूहानी – आत्मिक / दिल से / अंतःकरण संबंधी
तीरे-नज़र – नज़र का तीर / तीखे नयन
जाक – अत्यंत दुखदाई / अधिक कष्ट देने वाला / हृदयद्रावी
सरकार-ए-आलम – दुनिया के मालिक / खुद को सब कुछ समझने वाला
खाकसार – मिट्टी के सामान / तुच्छ
ख़ाक – धुल / राख / मिट्टी
ख्वाहिशे-निराश – निराश की इच्छा (चाह / अभिलाषा)
फ़िज़ा – माहौल / हवा / वातावरण