मनोरंजनभोजपुरी कन्यादान विवाह गीत – श्याम कुंवर भारतीnewsadminDecember 6, 2025December 6, 2025 by newsadminDecember 6, 2025December 6, 20250196 हरियर बंसवा के बाबा हो मड़वा छवाई दिहला। केवन कसूर बेटी के पराई कईला बाबा हो काहे कन्यादान कइला ना। छूटी जइहे सब सखियां सहेलियां...
मनोरंजनकविता – जसवीर सिंह हलधरnewsadminDecember 5, 2025 by newsadminDecember 5, 20250268 ऑपरेशन क्यों रोक दिया था, बीच राह संहार से । लाल किले ने प्रश्न किया है , भारत की सरकार से ? पहलगांव की...
मनोरंजनमौन की पंखुड़ियाँ – प्रियंका सौरभnewsadminDecember 4, 2025 by newsadminDecember 4, 20250106 मैंने देखा है, उन पत्तों को, जो आंधी में कांपते हैं, जिनकी जड़ें मिट्टी में हैं, पर मन खुली हवा का सपना देखता है। ...
मनोरंजनमेरी कलम से – रुचि मित्तलnewsadminDecember 4, 2025 by newsadminDecember 4, 20250191 आँचल में अपने ओढ लूँ दुनिया की हर ख़ुशी, फिर भी न जाने आस ये टूटी हुई है क्यों। हमको हमारी आँख में आँसू...
मनोरंजनडिजिटल दोस्ती – डॉ. सत्यवान सौरभnewsadminDecember 3, 2025 by newsadminDecember 3, 20250126 कंप्यूटर स्क्रीन के पीछे से, दोस्त मिले दुनिया के कई हिस्से। चैट करें, हँसे, खेलें ऑनलाइन, सीखें सब कुछ, बने सुपर फाइन। पर याद...
मनोरंजनसुन रही पदचाप मैं – नीलांजना गुप्ताnewsadminDecember 3, 2025 by newsadminDecember 3, 20250140 सुन रही पदचाप मैं भी घोर कलयुग आ रहा है, इक निहत्था सन्त यूँ निर्दोष मारा जा रहा है। प्रजा-रक्षक भी वहीं पर हाथ...
मनोरंजनगज़ल – ऋतुबाला रस्तोगीnewsadminDecember 2, 2025 by newsadminDecember 2, 2025094 कभी किसी को प्यार किया था। हमने भी इकरार किया था। आँखों आँखों में बातें कीं, आँखों से इजहार किया था। पत्ता पत्ता...
मनोरंजनगौरव – सुनील गुप्ताnewsadminDecember 2, 2025 by newsadminDecember 2, 20250264 है गौरव मुझे मेरी माटी का जिस भूमि पे मैंने जन्म लिया ! रहूँगा बना सदैव उसका ऋणी….., उसके लिए प्राणों को तज दूंगा !!1!!...
मनोरंजनप्रेम शृंगार पावन – कविता बिष्ट ‘नेह’newsadminDecember 1, 2025 by newsadminDecember 1, 20250268 निहारो मुझे आज प्यारे कन्हाई दिखी राधिका सी मनोहर। तुम्हारी सदा के लिए ही रहूँगी तुम्हीं हो हमारे अगोचर।। मिला है मुझे प्यार देखो पिया...
मनोरंजनऐ री सखि – अनुराधा पाण्डेयnewsadminNovember 30, 2025 by newsadminNovember 30, 20250161 सम्मुख जिसके सब झुक जाए । चिर आनंदित जो कर जाए । देखूँ तो मन होता चंगा । क्या सखि गंगा? . . . नहीं…...