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गज़ल – ऋतुबाला रस्तोगी

कभी किसी को प्यार किया था।

हमने   भी   इकरार   किया था।

 

आँखों आँखों में बातें कीं,

आँखों से इजहार किया था।

 

पत्ता पत्ता जान रहा था,

हाँ फूलों ने वार किया था।

 

हौले हौले बतियाते थे ,

बातों को अखबार किया था।

 

हर  सौदे में घाटा झेला,

दिल से यूँ व्यापार किया था।

-ऋतुबाला रस्तोगी, चाँदपुर, बिजनौर, उत्तर प्रदेश

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