मनोरंजन

प्रेम शृंगार पावन – कविता बिष्ट ‘नेह’

निहारो मुझे आज प्यारे कन्हाई दिखी राधिका सी मनोहर।

तुम्हारी सदा के लिए ही रहूँगी तुम्हीं हो हमारे अगोचर।।

मिला है मुझे प्यार देखो पिया से रखूँ मैं सदा ही सँजोकर।।

घटा से बहे जो वही तो लुभाए सजाये हुए है सरोवर।।

 

रचेंगी कलाई सजेगी सुहानी  रहेगी सदा ही सुहागन।

दया भाव का साज होगा हमेशा भरो नेह से आप दामन।।

सँवारो मुझे आज कान्हा तुम्हारे लिए प्रेम शृंगार पावन।

पगी बाँसुरी जो बजेगी हमेशा सुनूँगी सुरीली सुहावन।।

~कविता बिष्ट ‘नेह’, देहरादून , उत्तराखंड

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