भींगी बरसात में तेरी याद आ गई और मेरा दिल धड़का गई।
भींग कर मिली तन को राहत और तेरी याद दिल तड़पा गई।
जुल्फे तेरी काली घटाएं दिल पर गिरे आंखे बन के बिजलियां।
बारिश बौछार ले आईं तेरे तन एहसास और कहर बरपा गई।
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करना है जो आज ही कर लो कल क्या होगा किसने देखा है ।
कल कभी आता नहीं कल के भरोसे देंगे तुम्हे सबने धोखा है।
छोड़ आलस बहाना आज का काम आज ही है सब निपटाना।
कर्मवीर सफल महान बनोगे कैसे तुमने कभी इतने सोचा है।
– श्याम कुंवर भारती, बोकारो , झारखण्ड