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खास समझ लेता मैं पहले तो – गुरुदीन वर्मा

 

खास समझ लेता मैं पहले तो, ऐसा तो नहीं होता।

होता साथ खुदा का भी, ऐसे अकेला तो नहीं होता।।

खास समझ लेता मैं पहले—————-।।

 

मोह में फंसकर मैंने यहाँ, इनसे कल ली मोहब्बत।

होता फिदा वतन पे यदि मैं, गुमनाम तो यूँ नहीं होता।।

खास समझ लेता मैं पहले—————-।।

 

रखने को खुश अपनों को, मैंने बनायें ख्वाबो- महल।

करता कद्र यदि जमीं की तो मैं, बेघर तो यूँ नहीं होता।।

खास समझ लेता मैं पहले—————-।।

 

साथ मेरे थे दोस्त सभी, जब तक थी मेरे पास दौलत यह।

खास गरीबों की करता मदद तो, अफसोस तो यूँ नहीं होता।।

खास समझ लेता मैं पहले—————–।।

 

लो सम्भालो तुम यह वसीयत, हक है अब इसपे तुम्हारा।

करता सभी को यदि मैं रोशन तो, अंधेरा तो यूँ नहीं होता।।

खास समझ लेता मैं पहले—————–।।

– गुरुदीन वर्मा.आज़ाद

तहसील एवं जिला-बारां (राजस्थान)

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