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बदला पत्तों ने रंग – -सुनील गुप्ता

बदला जब-जब

है पत्तों ने रंग अपना….,

वो टूट गिरे जाकर, दूर ज़मीन पे !!1!!

 

छोड़कर सहारे अपने

वो जब दूर हुए…..,

तो रहे न फिर, किसी काम के !!2!!

 

बदला है पाला

जब यहाँ किसी ने….,

मिली उसे दुत्कार, सदा अपनों से !!3!!

 

छोड़कर गए जो

अपनी मूल जड़ों को…..,

वो कहाँ पनप सके, हैं खुद अकेले !!4!!

 

मत भूलो इसे

कि, जो चलाते हैं कुल्हाड़ी….,

वो हो जाते, खँडहर समय रहते !!5!!

– सुनील गुप्ता (सुनीलानंद), जयपुर, राजस्थान

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