व्यंग भरी यह कुंडली, करती दिल पर चोट।
बात बुरी उसको लगे, जिसके दिल में खोट।
जिसके दिल में खोट, तिलमिला मन में जाये।
पहले खरचे नोट, बाद में वह पछताये।
समझाते हैं शान, बोल कर अब खरी-खरी।
टूटें कुछ अरमान, बतकही सुन व्यंग भरी।
चीन की हिमाकत –
कर दें चीनी कम सभी, नहीं गले तब दाल।
देकर झटका चीन को, कर लें उन्नत भाल।
कर लें उन्नत भाल, लड़ें अब दृढ़ता से हम।
कर दें हम बेहाल, निकालें हम उसका दम।
बढ़े देश की “शान”, जोश कुछ ऐसा भर लें।
बढ़ा देश का नाम, चीन को लज्जित कर दें।
– कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश