मनोरंजन

महत्वाकांक्षा – दमयंती मिश्रा

आवश्यकता है जननी मन की ,

सब कुछ पाने की ललक जिज्ञासा।

जन्म देती महत्वाकांक्षाओं को।

हिम्मत होंसला से आगे बढ़ते कदम,

नाप लैते सारा ब्रह्मांड सोच रही।

पंख लगाकर उड़ता मन दे देता आकार।

सत्य करते सपने होते हैं पूरे ।

मन चंचल परन्तु आत्म ज्ञान ,

की पकड़ से बनता श्रेष्ठ मानव

कर्म करते रहे साथ देता।

आलस्य से काम नहीं बनते।

रख विश्वास उस पर कर्तव्य,

कर्म करो बनो कर्मठ सत्यनिष्ठा से।

यही सही मायने में जीवन,

मंत्र यही कसौटी पर खरे रहे ।

यही संदेश देती है अपनी संस्कृति ।

– दमयंती मिश्रा, मंदसौर, मध्यप्रदेश

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