मनोरंजनपूर्णिका (तेरा साया है हम) – श्याम कुंवर भारतीnewsadminSeptember 17, 2025 by newsadminSeptember 17, 20250121 तुम याद करो न करो मुझे गुजरे लम्हे याद आ ही जाते है। भूल जाऊं मैं तुमको कैसे सोए अरमां जाग ही जाते हैं।...
मनोरंजनहिंदी ग़ज़ल – जसवीर सिंह हलधरnewsadminSeptember 17, 2025 by newsadminSeptember 17, 20250155 मुहब्बत ने मुझे दुनिया से बेगाना बनाया है । ज़िगर का दर्द मैंने रोज पैमाना बनाया है । गवाही दे रहे हैं फूल,...
मनोरंजनगीत (हिंद के निवासी)- श्याम कुंवर भारतीnewsadminSeptember 16, 2025 by newsadminSeptember 16, 20250177 हिंद के निवासी महिमा हिंदी अपरम्पार है। अपनाया जिसने हिंदी किया उपकार है। कलमकारों को कभी हिंदी तूने लाचार न किया। जैसा चाहा लिखना पढ़ना...
मनोरंजननरेन्द्र मोदी – सविता सिंहnewsadminSeptember 16, 2025 by newsadminSeptember 16, 20250150 असंभव जिनके शब्दकोष में कभी आया ही नहीं, छिहत्तरवें में भी जोश उनका घटा ही नहीं। सिंह-गर्जना सी दहाड़ सुन दुश्मन हो जाते निढाल, भारत-पथ...
मनोरंजनगीत – जसवीर सिंह हलधरnewsadminSeptember 16, 2025 by newsadminSeptember 16, 20250339 मैंने एक फूल मांगा था, उसने तो गुलदान दे दिया । दोहे का वर मांग रहा था, पूरा छंद विधान दे दिया ।। ...
मनोरंजनहिंदुस्तान में हिंदी की दशा- झरना माथुरnewsadminSeptember 15, 2025 by newsadminSeptember 15, 20250187 बच्चे के मुख से निकलने वाला पहला शब्द मां अब मॉम बन गया है। जाने कितने रिश्ते बदल गए। भाई से ब्रो,बहन से सिस हो...
मनोरंजनकह के रहेंगे – सुनील गुप्ताnewsadminSeptember 15, 2025 by newsadminSeptember 15, 20250142 ( 1 ) गली गली में है कुत्तों का आतंक, बचें इनसे !! ( 2 ) चलें ध्यान से स्वयं को संभालते, बिना...
मनोरंजनग़ज़ल – रीता गुलाटीnewsadminSeptember 15, 2025 by newsadminSeptember 15, 20250180 चढें जो रंग मुहब्बत के कभी फीके नही होगे। दिलो मे उल्फतें होगी,कोई सौदे नही होगे। झुका ली आपने ऩज़रे,हमे अच्छा नही लगता।...
मनोरंजनगीत – जसवीर सिंह हलधरnewsadminSeptember 14, 2025 by newsadminSeptember 14, 20250277 प्राचीन सभ्यता की रथ है हिंदी से प्रीत निभानी है । पुरखों का दिखलाया पथ है ये भाषा बहुत सुहानी है ।। ये सुगम ज्ञान...
मनोरंजनमैंने चाहा कि—? – गुरुदीन वर्माnewsadminSeptember 13, 2025 by newsadminSeptember 13, 20250146 मैंने चाहा कि——-, नहीं, मैं यह नहीं करूँ, दिखाऊँ नहीं अपनी शर्म, बताऊँ नहीं खुद को बेशर्म, लेकिन मैं, मेरे मन को बदल नहीं...