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हिंदी ग़ज़ल – जसवीर सिंह हलधर

 

मुहब्बत ने मुझे दुनिया से बेगाना बनाया है ।

ज़िगर का दर्द मैंने रोज पैमाना बनाया है ।

 

गवाही दे रहे हैं फूल, तितली, और भँवरे भी ,

चमन को खुद चमन वालों ने वीराना बनाया है ।

 

सितम ढाते रहे हैं लोग उसकी बेजुबानी पर ,

इसी हालात ने वो शख़्स दीवाना बनाया है ।

 

बिलावल था कभी मैं, लोग अब मयनोश कहते हैं ,

इसी अंदाज़ का यारों ने अफ़साना बनाया है ।

 

भरी महफ़िल में मुझसे बात क्या की उस हसीना ने ,

मुझे मयकश कहा है ,उसको मयखाना बनाया है ।

 

अमीरी से बहुत मिलते हैं लक्षण बेज़मीरी के ,

अना को मार कर उसने ये काशाना बनाया है ।

 

नए अंदाज़ में बनने लगी हैं कोठियां ‘हलधर’,

रसोई से सटा उसने गुसलखाना बनाया है ।

– जसवीर सिंह हलधर, देहरादून

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