मनोरंजन

पूर्णिका (दुनियादारी)  – श्याम कुंवर भारती

कौन कहता है जो गिरता है वो फिर संभलता नहीं है।

ऐसा देखा  है गेंद गिरे जमीन पर और उछलता नहीं है।

 

आसमान में उड़ो मगर पाव जमीन पर जमे ध्यान रहे।

पांव जमीन से फिसला दुबारा जमीं पकड़ता नहीं है।

 

स्वाभिमान अच्छा मगर घमंड बड़ा बुरा होता इन्सां में।

छोड़ता नहीं किसी को यहाँ दिल कोई मचलता नहीं है।

 

दुनिया में अगर प्यार न हो तो जिंदगी बिरानी लगती है।

मुर्दो के शहर में दिल किसी के लिए धड़कता नहीं है।

 

अपनो से प्यार गैरो से नफ़रत यह तो इंसानियत न हुई।

अंजुली भारती दरिया ए इश्क दिल प्यासा तड़पता नहीं है।

– श्याम कुंवर भारती ,बोकारो, झारखंड

Related posts

हिंदुस्तान में हिंदी की दशा- झरना माथुर

newsadmin

गीतिका – मधु शुक्ला

newsadmin

चांद पर विक्रम – रेखा मित्तल

newsadmin

Leave a Comment