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वंदना – डॉ क्षमा कौशिक

चाह मन में सुरों को साध लूँ मैं।
शब्द में भावना को बाँध लूँ मैं।।
अर्थ गांभीर्य शब्दों में भरूँ मैं।
साधना वाक देवी की करूँ मैं।।

गुरु का हो वरद जो हाथ सिर पर।
प्रभु होवें कृपालु कर दया गर।।
साथ जो बंधु अरु मित्रों का पाऊँ।
शब्द की साधना साफल्य पाऊँ।।

– डॉ क्षमा कौशिक, देहरादून , उत्तराखंड

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