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गीतिका – मधु शुक्ला 

 

योगा करने से प्रिय मित्रो , हम नव जीवन पाते हैं,

नियमित इसको करने वाले,सेहत के गुण गाते हैं।

 

तन मन दोनों के संगम से,जीवन की गाड़ी चलती,

उन्नति के दरवाजे हमको, ये मिलकर ले जाते हैं।

 

बीमारी जब तन को घेरे, मन भी घबराया करता,

ऐसी हालत में शुभ अवसर,मिलने कम ही आते हैं।

 

अति घातक है जीवन शैली,दैहिक श्रम जिसने त्यागा,

प्राणी के पाचन को पीड़ा,भोजन  कण  पहुँचाते  हैं।

 

अपने हित में योगा दिन से, हम सीखें सेहत पायें,

ज्ञानी,ध्यानी,योगी, उत्तम, बातें सम्मुख लाते हैं।

— मधु शुक्ला, सतना , मध्यप्रदेश

 

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