मनोरंजन

विस्तार -शिप्रा सैनी

हे माधव! कभी-कभी सोचती हूँ,

आपने उस दुराचारी के हाथ क्यों नहीं रोके,

क्यों नहीं उस पर किया कोई आघात,

जबकि आप यह कर सकते थे।

वरन आप द्रौपदी के चीर को बढ़ाते गए,

दुःशासन को थकाते गए,

उसे विस्मय में डालते गए।

शायद इसलिए ना माधव!

कि स्त्री यह भान कर सके

कि स्वयं उसमें कितनी शक्ति है,

उसकी प्रार्थना में कितनी शक्ति है।

आप दिखा रहे थे एक स्त्री की

समर्थता सम्पूर्ण जग को।

हम लड़ नहीं सकते अनगिनत दुःशासन से

जैसे कृष्ण बढ़ाते गए द्रोपदी की चीर को

वैसे ही स्त्री के सामर्थ्य को

देना है अनंत विस्तार

ताकि पोंछ कर नयन नीर।

वह हर सके स्वयं की पीर ।

-शिप्रा सैनी मौर्या, जमशेदपुर

 

 

 

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