रामनाथपुर में रघुवर ने ज्योतिर्लिंग बनाया था।
दोष ब्रह्महत्या का शिव पूजन कर तुरत मिटाया था।
सागर तट पर बसा धाम यह, रामेश्वर कहलाता है,
पाप मिटाने किया गया अभिषेक शिवा को भाया था।
वास्तुकला है परम अनूठी, शिल्प बड़ा मन भावन है।
प्रांगण के बाइस कूपों का, नीर बड़ा ही पावन है।
अद्भुत खम्बे हैं कतार में, सबसे लंबा गलियारा,
सदा लगा रहता मेला भक्तों का, क्या भादों, क्या सावन है।
– कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश