मनोरंजन

स्वतन्त्रता – रीता गुलाटी

मस्तक सभी झुकाएं हित देश कर भलाई।
रहना है आज मिल कर करना नही लड़ाई।

देकर लहू वतन पर फिर जान भी गँवाई,
लड़ते सदा रहे हैं, इंसाफ़ की लड़ाई।

नाकाम कर दिये हैं दुश्मन के वार सारे,
मारा है दुश्मनों को इज्जत सदा बचाई।

दुनिया में सबने देखा,अपना महान भारत,
ऊँची है शान इसकी,देती हमें दिखाई।

सब देश आज़ माने तारीफ आज़ करते,
करतें हैं हिंद बातें करते है अब बढ़ाई।

माता समान मानें, माथा भी अब झुकातें,
सरहद पे जो मिटे हैं गाथा है आज़ गायी।

आज़ाद देश मेरा करता नही गुलामी,
जीती वतन की खातिर, तकदीर *रीता पाई।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चंडीगढ़

Related posts

जीवन – जया भराड़े बड़ोदकर

newsadmin

फसलों में लगती आग – प्रियंका सौरभ

newsadmin

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

newsadmin

Leave a Comment