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श्रावण माह में शिवार्चन (10) – (श्री त्रयंबकेश्वर जी, महाराष्ट्र) – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

प्रकट हुए धर रूप स्वयंभू, शिवा त्रयम्बक कहलाये,

ऋषि गौतम के तप करने पर, शिव त्रिदेव के सँग आये

माँ गंगा का रूप गौतमी, धारा बड़ी सुपावन है,

अद्भुत ज्योतिर्लिंग दरश कर,  शीश स्वयं हर झुक जाये।

 

तीन पर्वतों के अंचल में, मंदिर दिव्य पुरातन है।

करवाने रुद्राभिषेक को, होता शिव आवाहन है।

दोष निवारण कालसर्प का, भक्त त्रयम्बक में आते,

मंत्र और पुष्पों के द्वारा, होता नित आराधन है।

– कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश

 

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