मनोरंजन

बूंदों के नौलखा हार – अनिल भारद्वाज

आजा बरखा रानी आजा।
बूंदों के नौलखा हार से
सज-धज कर इठलाती आजा,
आजा बरखा रानी आजा।

इंद्रधनुष बनकर बूंदों की
सतरंगी किरणे आईं हैं,
बिजली बदली पुरवा तेरी
अगवानी करने आईं हैं।

बैठ अश्वमेघों के रथ पर
नीलगगन से नीचे आजा।
आजा बरखा रानी आजा।

उमड़ घुमड़ कर तुझे बुलातीं
काली काली मस्त घटाएं,
कोयल मोर पपीहे तुझको
रह-रह कर आवाज लगाएं।

बूंदों की पाजेब पहन कर
छम छम छम छम करती आजा।
आजा बरखा रानी आजा।
– अनिल भारद्वाज एडवोकेट हाईकोर्ट
ग्वालियर मध्य प्रदेश

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