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तन तो माटी का – डॉ अनमोल कुमार

तन तो बना माटी का ,
तन मंदिर कहलाय ।
ता में है आसन बना ,
जा में है देव बैठाय ।।
परमात्मा अंश आत्मा ,
निज आसन जमाय ।
पुजारी रूप एक बैठा ,
तन में मन है समाय ।।
मन बने मंदिर शासक ,
तन जहॅं तहॅं ले जाय ।
मन करता मनमर्जी ,
जो है मन को भाय ।।
मन कारण अहंकार है ,
मन कारण है विकार ।
मन कारण है देव होत ,
मन कारण सुविचार ।।
मन कारण दैत्य होत ,
मन कारण होत देव ।
मन ही है विष्णु ब्रह्मा ,
मन कारण महादेव ।।

– डॉ अनमोल कुमार, मोकामा, पटना, बिहार

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