मनोरंजन

गजल – ऋतु गुलाटी

दर्द का उठता समुन्दर देख लो,

इश्क मे चुभता ये खंजर देख लो।

 

खूबसूरत हो गयी अब जिंदगी,

नेक कोई काम अब कर देख लो।

 

जिंदगी हमको लगे सूनी भले,

आस दीपक का जलाकर देख लो।

 

डूबकर हम रह गये अब प्यार में,

आज तो तुम भी गुजर कर देख लो।

 

प्यार तुमको अब सदा मिलता रहे,

कर दुआ ऐसी बराबर देख लो।

 

जिंदगी भी आज तन्हा हो गयी,

दर्द मे डूबे हैं आकर देख लो।

 

प्यार में हमको बना लो बावरा,

दिल को दिल से मिलाकर देख लो।

 

छा गया संकट बड़ा घर मे दिखा,

जान की बाजी लगाकर देख लो।

– ऋतु गुलाटी ऋतंभरा, मोहाली, चंडीगढ़

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