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लोकतंत्र अब रो रहा – प्रियंका सौरभ

लोकतंत्र अब रो रहा, देख बुरे हालात।

संसद में चलने लगे, थप्पड़-घूँसे, लात॥

 

मर्यादा के नाम पर, होती केवल बात।

शब्दों में शालीनता, कर्मों में आघात॥

जनसेवा की राह से, भटके सब जज़्बात।

कुर्सी खातिर भूलते, रिश्ते-औ’-औकात॥

 

नीति गई कोने पड़ी, छाया स्वार्थ-विषाद।

जनता के विश्वास पर, होते रोज़ विवाद॥

वाणी में कटुता बढ़ी, टूटे सब संवाद।

सत्य दबा कोने खड़ा, झूठ हुआ आबाद॥

 

फिर भी आशा जीवित है, बदलेगा दिन-रात।

जागेगी जनता तभी, होंगे नये प्रभात॥

सच की शक्ति जीतकर, देगी फिर सौगात।

लोकतंत्र मुस्का उठे, मिट जायेंगे घात॥

— डॉ. प्रियंका सौरभ, उब्बा भवन, आर्यनगर,

हिसार (हरियाणा) – 125005, मो० -:7015375570

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