राष्ट्रीय

डॉ.अनिल शर्मा “अनिल” का व्यक्तित्व प्रणम्य है – कुमार संदीप

neerajtimes.com – डॉ. अनिल शर्मा ‘अनिल’ का व्यक्तित्व साहित्य, शिक्षा, संवेदना और सामाजिक चेतना का अनुपम संगम है। हिन्दी साहित्य, विधि, आयुर्वेद एवं पत्रकारिता जैसे विविध क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले डॉ. अनिल शर्मा ने अपनी लेखनी के माध्यम से समाज और मानवीय मूल्यों को सशक्त अभिव्यक्ति प्रदान की है।
कविता, कहानी, लघुकथा, व्यंग्य, समीक्षा एवं आलेख जैसी अनेक साहित्यिक विधाओं में सक्रिय डॉ. अनिल शर्मा की प्रमुख कृतियों में “मुझको जग में आने दो”, “जिंदगी गीत हो जाएगी” एवं “प्रकृति का ऐसे न शोषण करो” विशेष रूप से चर्चित हैं।
“विद्या वाचस्पति” एवं “विद्यासागर” जैसी मानद उपाधियों से सम्मानित डॉ. शर्मा ने अनेक साहित्यिक संकलनों का संपादन कर साहित्य जगत को नई दिशा दी है। उनकी रचनाएँ देश-विदेश के अनेक संकलनों एवं पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं।
सरल, विनम्र और आत्मीय व्यक्तित्व के धनी डॉ. अनिल शर्मा ‘अनिल’ का साहित्यिक योगदान समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

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