पीपल की छाया शीतल सुख देती,
थकी हुई राहें यहाँ सुकून लेती।
पत्तों की सरसर धुन मन हरती,
धूप भी यहाँ आकर नरम पड़ती।
जड़ों में छुपी अनकही कथा बहती,
पंछी बैठ गाते जीवन की गाथा।
हवा संग झूमे हरियाली की माया,
मन के अंदर शांति का दीप जलता।
छाया में मिलती खोई हुई हँसी,
धरती संग जुड़कर जीवन मुस्काता।
सपनों को मिलती नई उड़ान यहाँ,
सन्नाटा भी गुनगुन गीत सुनाता।
पीपल तले बैठ समय ठहर जाता,
दर्द भी आकर धीरे से सोता।
हर पत्ता जैसे संदेश सुनाता,
प्रकृति का अनुपम आँगन बन जाता।
जीवन की धारा निर्मल बहती,
छाया में मिलती आत्मा को राह।
सादगी में छिपा अनमोल खजाना,
पीपल की छाया जीवन सिखाती।
– राजलक्ष्मी श्रीवास्तव
जगदलपुर राजिम, छत्तीसगढ़