माफ करना यार मेरी गलतियां,
प्यार मे रखना नही खामोशियां।
यार ने नाचीज को दी दूरियां,
रास दिल को आ गयी तन्हाइयां।
साथ तेरे मैं रहूँ खुशहाल भी,
दोस्ती जीतेगी सारी बाजियां।
मैं हसूँ कैसी तेरी कारीगरी,
दूर होती यार मेरी तल्खियां।
चीर कर अँधेरो को बन रोशनी,
नाप ले आकर जरा गहराइयाँ।
जुस्तजू मेरी बने हो अब यार तुम,
छा रही इन आँखो मे मदहोशियां।
क्यो करे नाशाद दिल को अब मेरे,
फिर कहाँ भाती हमें ये स़ख्तियां।
– रीता गुलाटी.ऋतंभरा, चण्डीगढ़