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कविता – इंजी. अरुण कुमार जैन

 

आतंकवाद व उग्रवाद के बीज रोपकर,
हथियारों की फसल धरा पर उगवाते हो!
कर बलात्कार निरीह बेटी बहिनों का,
खून के आँसू दे उनको तुम तड़पाते हो!
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हर दिन अपराधों को करते हो, तुम सब मिलकर!
हम पर मिसाइल आक्रमण
भी करवाया,
धराशायी कर डाला भारत के वीरों ने,
उल्टे लहूलुहान कर तुमको मार भगाया.
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लाहौर, कराची, रावलपिंडी सिसक रहा है,
सियाल कोट में तड़प रहे हैं तेरे भाई,
बलूचिस्तान में मारे जाते सैनिक तेरे,
फिर भी बुद्धि हे सठ तुझे न आयी!
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घुस- घुसकर मारेंगे तुमको तेरे घर में,
बोटी बोटी नोच, मिटा देंगे हम तुमको,
मत टकराओ भारत माता के शोलों से,
शूर वीर, शौर्य, पराक्रम बलशाली जो.
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मोदी, योगी अमित शाह का यह भारत है,
लल्लू, पंजू नहीं यहाँ जो डर जायेंगे,
वीर शिवा, आजाद, प्रताप के स्वरुप हैं,
अस्तित्व तुम्हारा मिटा, तिरंगा हम फहराएंगे।

इंजी. अरुण कुमार जैन-विनायक फीचर्स)

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