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दोहे – मधु शुक्ला

शीतकाल  में  आपको, यदि रहना सानन्द ।

गर्म,पेय,परिधान फिर, नित गहना सानन्द।।

 

वर्षा ऋतु शीतल सुखद, लेकर आये वायु।

छंद सृजन के वक्त ये, अति मन भाये वायु।।

 

सुबह  सबेरे  ग्रीष्म  में, विचरण करते लोग।

स्वास्थ्य हेतु इस रीति को , उत्तम कहते लोग।।

 

सूझ  बूझ द्वारा सभी , गहते  ऋतु  आनन्द।

अलग-अलग अनुभूति को, कहते ऋतु आनन्द।।

— मधु शुक्ला, सतना, मध्यप्रदेश

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