मनोरंजनग़ज़ल – रीता गुलाटीnewsadminApril 12, 2026 by newsadminApril 12, 2026063 जज्बात उठे दिल मे, हम यार तुम्हारे हैं। मचले हैं बडे अरमा,देखूँ जो ऩज़ारे हैं। मकबूल भले जग मे, दिल से तो तुम्हारे हैं।...
मनोरंजनस्वयं बदलो, बदलेगी दुनिया – सुनील गुप्ताnewsadminApril 11, 2026 by newsadminApril 11, 2026060 ( 1 ) स्वयं बदलो बदलेगी दुनिया, आओ, महकालें मन की बगिया !! ( 2 ) बदलो अपनी स्वयं की चाल, छोड़ो करना, औरों...
मनोरंजनसुबह – विनीति शर्माnewsadminApril 10, 2026 by newsadminApril 10, 2026068 सुबह के इंतजार में सिमटी सी कली थी मैं… रजनी का दुशाला लिए सूरज से मिलने चली थी मैं … थी आभा मुख पर, अधरों...
मनोरंजनउम्मीद – रश्मि मृदुलिकाnewsadminApril 8, 2026 by newsadminApril 8, 2026090 एक दीप दिल में जल रहा है| फिर एक ख्वाब पल रहा है| तारों ने थककर आंखें मूंद ली है निशा में कौन जुगनूं जग...
मनोरंजनइंसानियत – राजलक्ष्मी श्रीवास्तवnewsadminApril 7, 2026 by newsadminApril 7, 2026083 जब पराई पीड़ा देख आँखें नम हो जाएं, और चुपचाप दिल किसी बोझ को ढो जाए। जब भूले-बिसरे से प्राणी में भी अपनापन दिखे, और...
मनोरंजनऋतुराज – नीलांजना गुप्ताnewsadminApril 7, 2026 by newsadminApril 7, 20260106 फिर समय ने अँगड़ाई लेकर मौसम का घूँघट खोला है। पतझड़ के मुखड़े में छाई मधुमय बसंत की बेला है। हर डाल शर्म से...
मनोरंजनग़ज़ल – मणि अग्रवालnewsadminApril 7, 2026 by newsadminApril 7, 2026086 चाहिए अब नहीं रोज़ वादे नये, बोलिए आप अपने इरादे नये। ख़त्म हो जाएँगे फ़ासले फिर सभी, सिर्फ़ संवाद के पुल बना दे नये। पाँव...
मनोरंजनस्मृति श्रृंगार की – सविता सिंहnewsadminApril 5, 2026 by newsadminApril 5, 2026086 श्रृंगार क्या है केवल सौंदर्य प्रसाधन? या एक स्त्री के आत्मसम्मान की पहचान? क्रूर काल जब छीन ले प्राणाधार, तो क्यों बदल दी जाती है...
मनोरंजनकविता – श्याम कुंवर भारतीnewsadminApril 4, 2026 by newsadminApril 4, 20260102 बूढ़ा न नादान अभी तो मैं जवान हूं। दूध घी बादाम अभी तो मैं जवान हूं। उम्र ढले या न ढले दिल रहे कायम...
मनोरंजनदोहा मुक्तक – सुधीर श्रीवास्तवnewsadminApril 4, 2026 by newsadminApril 4, 20260100 जिंदा होकर स्वयं को, मुर्दा माने लोग। जाने क्यों हैं सोचते, उन पर है अभियोग।। समझ नहीं है आ रहा, कैसी है यह रीति –...