( 1 ) सूरज उगले
नित आग के गोले..,
सूखें हैं गले !!
( 2 ) लू के थपेड़े
शरीर पर पड़ें..,
चमड़ी जले !!
( 3 ) तपती धरा
शरीर अधमरा..,
पथिक हारा !!
( 4 ) इससे बचें
जल परिंडे रखें..,
विहंग बचें !!
( 5 ) आगे की सोच
वन वृक्ष लगाएं..,
श्वासें बढ़ाएं !!
– सुनील गुप्ता
जयपुर, राजस्थान