Category : मनोरंजन

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मुझमे ही निहित हो प्रियवर – सविता सिंह

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नीरव  मन  में  उद्वेलित  कुछ वह  लम्हें, खुलने  को  आतुर  अधखुली  सी गिरहें, कुसुमित  स्मित   मृदु  प्रणय के वह पल दृग  पुलिनों  में तैरती  वो ...
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गुरु वंदन  (अगुतंक कविता) – डॉ अमित कुमार

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माँ — जिसने प्रथम शब्द सिखाया, जिसकी लोरी में जीवन का पहला संगीत बसा। उसकी ममता ही मेरे व्यक्तित्व की जड़ें बनी, उसका आशीष ही...
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भोजपुरी कन्यादान विवाह गीत – श्याम कुंवर भारती

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हरियर बंसवा के बाबा हो मड़वा छवाई दिहला। केवन कसूर बेटी के पराई कईला बाबा हो काहे कन्यादान कइला ना। छूटी जइहे सब सखियां सहेलियां...