मनोरंजनमेरी कलम से – नीलांजना गुप्ता by newsadminSeptember 14, 202602 Share0 उन्मुक्त हृदय की वीणा से, सासों की सरगम बजती है। भावों की श्रद्धाजंलि लेकर, संगीत की प्रतिमा सजती है। तब मन मयूर इस जीवन का, वह परम् तत्व बन जाता है। पा लेता है संकल्पों से, जो भी आदर्श बनाता है। – नीलांजना गुप्ता, बाँदा, उत्तर प्रदेश