मनोरंजनलेकिन कहाँ को मैं चला ?- गुरुदीन वर्माnewsadminSeptember 7, 2025 by newsadminSeptember 7, 20250169 चला हूँ अब मैं यहाँ से, लेकिन कहाँ को मैं चला। क्या करूँ किससे शिकायत, क्यों यहाँ से मैं चला।। चला हूँ अब मैं...
मनोरंजनभोजपुरी कजरी लोक गीत – श्याम कुंवर भारतीnewsadminSeptember 7, 2025 by newsadminSeptember 7, 20250233 सइयां आए नाही गोरिया के भवनवा में। गोरिया रोई रोई बैठी सावन के महिनवा में। वन में नाचन लागे मोर,मोरनी बिहसे बड़ी जोर।...
मनोरंजनगुरु – डॉ क्षमा कौशिकnewsadminSeptember 7, 2025 by newsadminSeptember 7, 20250219 गुरु सम नहीं कोई उपकारी। गुरु की महिमा जग में न्यारी।। ज्ञान प्रकाश करे शुभकारी। सब प्रकार गुरु मंगल कारी।। **गुरु सम कोई नहीं उपकारी।...
मनोरंजनगणेशोत्सव – कर्नल प्रवीण त्रिपाठीnewsadminSeptember 7, 2025 by newsadminSeptember 7, 20250179 ज्यों ज्यों दिन हैं बीतते, चौदस आती पास। निकट विदाई का दिवस, होता हृदय उदास।। उत्सव के इन नौ दिनों, मची हर जगह...
मनोरंजनजाने कहाँ गए वो दिन – सुनील गुप्ताnewsadminSeptember 4, 2025 by newsadminSeptember 4, 20250196 ( 1 ) कहाँ गए वो दिन पुराने, वो दोस्त हँसी-खुशी के तराने !! ( 2 ) कहाँ गए वो मेहमां हमारे, वो...
मनोरंजननन्हे कदम – डॉ. सत्यवान सौरभnewsadminSeptember 4, 2025September 4, 2025 by newsadminSeptember 4, 2025September 4, 20250209 नन्हे कदम चलते चले, खुशियों के गीत गा चले। फूलों की राहों में रंग बिखेरे, हर दिन नई कहानी कहे। सूरज की किरणों...
मनोरंजनएम० ए० पास लड़कियां – रेखा मित्तलnewsadminSeptember 3, 2025 by newsadminSeptember 3, 20250160 हिंदी में एम० ए० पास लड़कियां अचानक से ब्याह दी जाती हैं फिर वह लेकर नई आशाएं घर आंगन में बो देती हैं कविताएं...
मनोरंजनग़ज़ल (हिंदी) – जसवीर सिंह हलधरnewsadminSeptember 3, 2025 by newsadminSeptember 3, 20250377 आग में अब घी मिलना छोड़ दे । दूसरों के घर जलाना छोड़ दे । हो गया बर्बाद तू इस शौक में ,...
मनोरंजनग़ज़ल (हिंदी) – जसवीर सिंह हलधरnewsadminSeptember 2, 2025 by newsadminSeptember 2, 20250140 आग में अब घी मिलना छोड़ दे । दूसरों के घर जलाना छोड़ दे । हो गया बर्बाद तू इस शौक में ,...
मनोरंजनमेरी कलम से – रुचि मित्तलnewsadminSeptember 2, 2025 by newsadminSeptember 2, 20250326 उनसे न पूछिए मज़ा बारिश की बूँद का, छप्पर तलक़ नसीब न जिनको कभी हुआ। <> छोटी सी है तमन्ना दिले बेकरार की, आँसू...