मनोरंजन

जाने कहाँ गए वो दिन – सुनील गुप्ता

 

( 1 ) कहाँ

गए वो दिन पुराने,

वो दोस्त हँसी-खुशी के तराने !!

 

( 2 ) कहाँ

गए वो मेहमां हमारे,

वो प्यार-मोहब्बत के रिश्ते सारे !!

 

( 3 ) कहाँ

गए वो खेल किस्से,

वो छुपन-छुपाई प्यार के चर्चे !!

 

( 4 ) कहाँ

गए वो साथी प्यारे,

वो पीपल-अमराई के सहारे !!

 

( 5 ) बीते

रे भैया वो दिन सुनहरे,

अब लैपटॉप मोबाइल में डूबे गहरे !!

 

( 6 ) कहाँ

भागे रे इंसान, समय कहाँ रे,

अब मरघट पर अकेले, शव जले रे !!

– सुनील गुप्ता (सुनीलानंद), जयपुर, राजस्थान

Related posts

मानव का जीवन – जसवीर सिंह हलधर

newsadmin

वक्फ संशोधन बिल 2024: पारदर्शिता और जवाबदेही की ओर एक क्रांतिकारी कदम – प्रियंका सौरभ

newsadmin

भावपूर्ण भावों की दिव्यांजलि है (काव्य संग्रह) – सुधीर श्रीवास्तव

newsadmin

Leave a Comment