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साधन कभी साध्य नहीं हो सकता : आचार्य नवीन

neerajtimes.com गया जी ( डॉ अनमोल कुमार)। रेड क्रॉस सोसायटी, अष्टांग योग संस्थान एवं मानव अध्ययन केंद्र के सभागार में आयोजित आचरण ज्ञान गोष्ठी को संबोधित करते हुए आचार्य नवीन जी ने कहा कि साधन कभी साध्य नहीं हो सकता। साधन का उपयोग साध्य को प्राप्त करने के लिए किया जाता है। मानव जीवन का साध्य सुख, शांति, संतोष और आनंद है, जिसकी प्राप्ति मानवीय आचरण के अनुरूप जीवन जीने से होती है।
उन्होंने कहा कि आज का मानव अज्ञानतावश साधन को ही साध्य मान बैठा है। परिणामस्वरूप, जीवन में भौतिक साधनों की भरमार होने के बावजूद वह पीड़ित है। मानव को यह समझने की आवश्यकता है कि केवल साधनों की उपलब्धता से सुख प्राप्त नहीं होता, बल्कि सही समझ और मानवीय आचरण के साथ जीवन जीने से वास्तविक खुशहाली आती है।
श्रम, सेवा और ज्ञान पर विशेष चर्चा
आचार्य नवीन जी ने श्रम, सेवा और ज्ञान के महत्व पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि श्रम कुशलता एवं निपुणता के साथ कार्य करने में प्रमाणित होता है। वहीं, सेवा का अर्थ मूल्यों का आदान-प्रदान है। सेवा मानवीय संबंधों में संवेदनशीलता, उत्तरदायित्व और परस्पर सहयोग को अभिव्यक्त करती है।
उन्होंने बताया कि मुख्यतः तीन प्रकार के लोगों को विशेष रूप से सेवा की आवश्यकता होती है। पहला, नवजात शिशु, जिसे शारीरिक देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता होती है। दूसरा, शारीरिक एवं मानसिक रूप से पीड़ित व्यक्ति, जिसे सहयोग और देखभाल की जरूरत होती है। तीसरा, बुजुर्ग, जिनकी सेवा करना और उनकी आवश्यकताओं का ध्यान रखना हमारा मानवीय दायित्व है।
मानव जीवन के तीन महत्वपूर्ण कार्यक्रम
गोष्ठी के अंत में आचार्य नवीन जी ने मध्यस्थ दर्शन सह-अस्तित्ववाद के अनुसार मानव जीवन के तीन महत्वपूर्ण कार्यक्रमों को स्पष्ट करते हुए कहा कि—
समझे हुए को समझाना।
सीखे हुए को सिखाना।
किए हुए को कराना।
उन्होंने कहा कि सही समझ को दूसरों तक पहुँचाना, सीखे हुए ज्ञान को साझा करना और किए हुए कार्य को दूसरों से कराना, मानव जीवन के महत्वपूर्ण कार्यक्रम हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से ज्ञान, कौशल और व्यवहार को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त होता है।
गोष्ठी का मुख्य संदेश रहा कि साधन जीवन जीने का माध्यम हैं, साध्य नहीं। वास्तविक सुख, शांति, संतोष और आनंद की प्राप्ति सही समझ तथा मानवीय आचरण के अनुरूप जीवन जीने से ही संभव है।उन्होंने कहा कि मानवीय आचरण से ही सुख, शांति, संतोष और आनंद की प्राप्ति संभव है।

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