गुरु बिन ज्ञान न मिले रे
मिले नहीं जीवन लक्ष्य !
ढूंढ़ले मनवा सच्चा गुरु..,
फिर साध सकेगा साध्य !!1!!
गुरु बिन अज्ञान छंटे न रे
मिले नहीं सत्य की राह !
भटके जीवन यहाँ-वहाँ रे..,
पूर्ण न होए मोक्ष चाह !!2!!
गुरु बिन मिटे न दोष रे
दूर न होए विषाक्त सोच !
बनाले प्रकृति को गुरु रे..,
चल जीवन अर्थ को खोज !!3!!
गुरु बिन ज्ञान ध्यान नहीं रे
चले भटकत संसार माहिं !
बिन गुरु प्रभु दर्शन न होएं..,
भव सागर पार कैसे जाहिं !!4!!
गुरु बिन आत्मज्ञान नहीं रे
जीवन प्राणहीनसा हो जाए !
मिल जाए एक सत् गुरु तो..,
जीवन आनंद से भर जाए !!5!!
-सुनील गुप्ता, जयपुर, राजस्थान