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अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ बिहार जिला इकाई – मुंगेरडीएम को ज्ञापन सौपा

neerajtimes.com मुंगेर। स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर से संबंधित प्रश्न पूछने पर शिक्षक  गुरु प्रसाद के निलंबन को तत्काल वापस लेने की मांग को लेकर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, बिहार के जिला इकाई-मुंगेर की ओर से केरल के मुख्यमंत्री,  राज्यपाल एवं  प्रधानमंत्री के नाम सम्बोधिय ज्ञापन जिला के डीएम को सौपा गया।
जिला के अध्यक्ष कृष्णकांत सिंह के नेतृत्व में महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने डीएम को ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में अभय नाथ कुमार (प्रदेश सचिव), ऋषव रमन (मीडिया प्रभारी), संदीप कुमार (सयुंक्त सचिव), विजय कुमार आदि शामिल रहे। जिला अध्यक्ष ने बताया कि महासंघ आज देशभर में डीएम को इस गम्भीर बिषय पर ज्ञापन सौंपा है।कहा कि अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ देशभर के लगभग 14 लाख शिक्षकों का राष्ट्रीय संगठन है। हमारा दृढ़ विश्वास है कि शिक्षा केवल ज्ञानार्जन का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्रबोध, राष्ट्रीय चरित्र, सांस्कृतिक आत्मगौरव और कर्तव्यबोध के निर्माण का प्रमुख साधन है। केरल के कासरगोड जिले के कुंबला सब-डिस्ट्रिक्ट में आयोजित विद्यालयी Social Science Freedom Quiz में स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर से संबंधित प्रश्न पूछे जाने के कारण प्रश्न निर्माण से जुड़े शिक्षक श्री गुरु प्रसाद के निलंबन की घटना ने देशभर के शिक्षक समुदाय में गंभीर चिंता उत्पन्न की है।अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ इस कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा करता है और श्री गुरु प्रसाद का निलंबन तत्काल एवं अविलंब वापस लेने की मांग करता है।स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक व्यक्तित्व हैं। उनके क्रांतिकारी जीवन, ब्रिटिश शासन द्वारा दिए गए कठोर दंड तथा अंडमान की सेलुलर जेल में उनके कारावास का अध्ययन इतिहास का स्वाभाविक हिस्सा है। उनके विचारों से सहमति असहमति हो सकती है, किंतु सावरकर के बारे में प्रश्न पूछना न अपराध है, न अनुशासनहीनता और न किसी राजनीतिक विचारधारा का प्रचार। यदि प्रश्न में कोई तथ्यात्मक अथवा भाषाई त्रुटि थी तो उसे सुधारा जा सकता था; इसके लिए शिक्षक को निलंबित करना किसी भी दृष्टि से उचित और अनुपातिक कार्रवाई नहीं है।
यह भी विचारणीय है कि स्वतंत्र भारत में विभिन्न सरकारों और राजनीतिक विचारधाराओं द्वारा सावरकर को सार्वजनिक जीवन में ऐतिहासिक व्यक्तित्व के रूप में स्वीकार किया गया है। पोर्ट ब्लेयर स्थित हवाई अड्डे का नाम वीर सावरकर के नाम पर है, पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा उनके सम्मान में डाक टिकट जारी किया गया था तथा संसद भवन में उनका चित्र स्थापित है। ऐसी स्थिति में विद्यालयी क्विज में सावरकर का नाम आ जाना गंभीर शैक्षिक अपराध कैसे बन गया, यह स्वयं विचारणीय है।अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की स्पष्ट और दृढ़ मांग है कि श्री गुरु प्रसाद का निलंबन तत्काल एवं अविलंब वापस लेकर उन्हें सम्मानपूर्वक सेवा में बहाल किया जाए। साथ ही, पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं पूर्वाग्रह-मुक्त जांच कर प्रश्न की तैयारी, उसके स्रोत और अनुमोदन की प्रक्रिया का परीक्षण किया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी ऐतिहासिक व्यक्तित्व पर प्रश्न पूछना मात्र वैचारिक अथवा अनुशासनात्मक अपराध न माना जाए तथा शिक्षकों की अकादमिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा हो।  – डॉ अनमोल कुमार

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