मनोरंजन

ग़ज़ल – रीता गुलाटी

शेष अब कहाँ बाकी, जो सुना है लोगों ने।

छिप नही सका कुछ भी,लिख दिया किताबों ने।

 

हारना नही हिम्मत, खुद पे रख भरोसा भी,

रास्ता दिखाया है तुम को रहनुमाओं ने।

 

इक ऩज़र ने देखा जो, भा गया था वो हमको,

कर दिया बयां सब कुछ आपकी निग़ाहों ने।

 

जिंदगी खुशी देगी,दूर ग़म़ के हो साये,

हमको ये मिली खुशियां दी है जो फरिश्तों ने।

 

साथ मे तुम्हारे अब यार मुस्कुराना है,

देखने हँसी सपने लिख दिये नसीबों ने।

– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चण्डीगढ़

 

 

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