मनोरंजन

मेरी कलम से – नीलांजना गुप्ता

शख्स जो अनजान था गीत, गजल से,

तेरे ही प्यार ने उसे शायर बना दिया।

 

फौलाद का बना था भाले भी लगे फूल,

मुस्कान ने तेरी उसे घायल बना दिया।

 

हर आहट से भ्रम हुआ पदचाप है तेरी,

तेरी आरजू ने उसको पागल बना दिया।

 

अब तलक था प्यासा एक बूँद के लिए,

दीदार ने ‘नीलू’ तेरे सागर बना दिया।

– नीलांजना गुप्ता, बाँदा, उत्तर प्रदेश

Related posts

मेरी कलम से – डा० क्षमा कौशिक

newsadmin

एक गीत लिखूं – शोभा नौटियाल

newsadmin

जमाना गुजर गया – सुनील गुप्ता

newsadmin

Leave a Comment