मनोरंजन

घनाक्षरी – मंजु श्रीवास्तव ‘मन’

धूम मची धूम मची, होली की है धूम मची,,

रंग गए सब गाल, उड़ रहा है गुलाल।

 

जीजा खेले साली खेले, ननद औ भाभी खेले,

चहुं ओर है धमाल, बिगड़े सभी के हाल।

 

मोहक ठिठोली करें, भंग से तरंग भरें,

सजे गुझिया के थाल, बज रही खड़ताल।

 

हर बाला राधा लागे, बालक मोहन लागे,

अंबर हुआ है लाल, धरा हो रही निहाल।

– मंजु श्रीवास्तव ‘मन’, देहरादून, उत्तराखंड

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