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मेरी कलम से – डा० क्षमा कौशिक

<>प्रेम<>

प्रेम पलने दो हृदय में

द्वेष का न लेश हो,

हृदय की गहराइयों में

प्रेम ही अशेष हो।

ज्यों सुमन में गंध

वायु में प्राण का वेग हो,

मुझमें तुम और तुममें मैं

बस भाव यह अद्वेत हो।

– डा० क्षमा कौशिक, देहरादून , उत्तराखंड

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