सर्व कामना पूरी करते, भक्तों की मनकामेश्वर।
नदी गोमती के तट बसते, जन-जन के शिव परमेश्वर।
मनोकामना पूरी होती, जो अभिषेक करे प्रभु का,
थोड़े में ही अति प्रसन्न हों, श्रावण में श्री भूतेश्वर।
(श्री कोटेश्वर जी, कच्छ) –
सागर तट पर कोटेश्वर की, ध्वजा नित्य फहराती है।
बम-बम भोले की आवाजें, सर्व दिशा गुंजाती है।
बार-बार नित चरण पखारें, वापस आ-आ कर लहरें,
पश्चिम सीमा की रखवाली, करते स्वयं पिनाकी है।
– कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश