मनोरंजन

वंदेमातरम् – डॉ क्षमा कौशिक

उच्च हिमालय के श्रृंगों पर राष्ट्र ध्वजा फहराये।
फहर-फहर कर आजादी के गीत सुहाने गाये।।

वीर शहीदों की बलिदानी गाथा को दुहराती।
पवन चले मतवाली सबके तन मन को हर्षाती।।
लहर-लहर संगीत बजा जय गान सुनाये गंगा।
घर-घर देखो बड़ी शान से फहरा आज तिरंगा।।
सागर में भी आज तिरंगा गौरव से लहराये।
वंदेमातरम् वंदेमातरम् दसों दिशा मिल गायें।।

सुन कर बलिदानी गाथाएँ मन में उठे उमंगें।
निकल पड़े बच्चे नर-नारी लेकर हाथ तिरंगे।।
आजादी का स्वप्न देखते जो जगते तंद्रा में।
भारत को आजादी देकर सोये चिर निंद्रा में।।
आज सभी समवेत स्वरों में महिमा उनकी गायें।
आजादी की रक्षा की सौगंध पुनः दोहराये।।

जिन वीरों ने आजादी पाने को जान गँवाई।
स्वतंत्रता की बलिवेदी पर धारा लहू बहाई।।
याद रहे उनकी कुर्बानी श्रद्धा सुमन चढ़ाओ।
देख तिरंगे को लहराता उनको भूल न जाओ।।
मिली हुई आजादी की कीमत को न बिसरायें।
मातृ वंदना राष्ट्र गान अरु वंदे मातरम गायें।।
– डॉ क्षमा कौशिक, देहरादून , उत्तराखंड

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