राष्ट्रीय

दहेज मुक्त विवाह करने वाली महिलाओं को प्रथम भूमिहार महिला समाज ने किया सम्मानित

neerajtimes.com मुंबई (कुमार संदीप) –  प्रथम भूमिहार महिला समाज द्वारा आयोजित सावन मिलन समारोह इस वर्ष नारी शक्ति, सामाजिक एकजुटता और सकारात्मक बदलाव का प्रेरक मंच बनकर सामने आया। मुंबई सहित देश के विभिन्न शहरों में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से समाज को गौरवान्वित करने वाली महिलाओं को सम्मानित करने के साथ-साथ सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जागरूकता का संदेश भी दिया गया। मुंबई में आयोजित सावन मिलन समारोह में प्रथम भूमिहार महिला समाज की मुंबई इकाई का दायित्व संभाल रहीं करुणा सिंह और अनीता शर्मा के नेतृत्व में एक विशेष पहल की गई। समारोह में उन तीन महिलाओं—नूतन कनक, सविता कुमारी एवं अनिता सिंह—को सम्मानित किया गया, जिन्होंने अपने बच्चों का विवाह बिना दहेज के कर समाज के सामने अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।

इन महिलाओं को मंच पर आमंत्रित कर प्रथम भूमिहार महिला समाज, मुंबई की ओर से सम्मानित किया गया। आयोजकों का उद्देश्य था कि दहेज जैसी सामाजिक कुरीति के विरुद्ध समाज में सकारात्मक सोच विकसित हो और अन्य परिवार भी दहेज मुक्त विवाह के लिए प्रेरित हों। इस अवसर पर करुणा सिंह ने संदेश देते हुए कहा, “मैं तो अपनी बहनों को यही संदेश देना चाहूंगी कि बेटी लाओ, दहेज मत लाओ।” उनका यह संदेश समारोह में उपस्थित महिलाओं और समाज के लोगों के बीच विशेष रूप से सराहा गया।

प्रथम भूमिहार महिला समाज की शुरुआत वर्ष 2020 में कुछ जागरूक महिलाओं के सामूहिक प्रयास से हुई थी। यह एक पंजीकृत संस्था है, जो सामाजिक एवं महिला सशक्तीकरण से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से समाज को सकारात्मक दिशा देने का प्रयास कर रही है। संस्था की गतिविधियां दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, असम, गुजरात, बिहार और झारखंड सहित विभिन्न क्षेत्रों में संचालित हो रही हैं। संस्था के विस्तार और सामाजिक गतिविधियों को गति देने में करुणा सिंह का योगदान भी उल्लेखनीय बताया गया। संस्था की संस्थापक सदस्यों में दिव्या शर्मा, मुक्ताकवि शर्मा, ऊषा सिन्हा, नीलम सिंह, नीरा सिंह एवं रिनीता सिंह शामिल हैं।

सावन मिलन समारोह में जहां एक ओर महिलाओं ने उत्सव और आपसी स्नेह का आनंद लिया, वहीं दूसरी ओर दहेज मुक्त विवाह जैसी सामाजिक पहल को सम्मान देकर यह संदेश दिया गया कि समाज की वास्तविक प्रगति केवल उत्सव मनाने में नहीं, बल्कि अपनी सोच और परंपराओं में सकारात्मक बदलाव लाने में है। दहेज मुक्त विवाह करने वाली महिलाओं का सम्मान निश्चित रूप से समाज की अन्य महिलाओं और परिवारों को भी प्रेरित करेगा। सावन के इस उत्सवी माहौल में नारी शक्ति, सामाजिक चेतना और बदलती सोच का यह संगम एक अनुकरणीय पहल बनकर सामने आया।

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