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श्रावण माह में शिवार्चन (4) – (काशी विश्वनाथ जी, वाराणसी) – कर्नल प्रवीण शंकर त्रिपाठी

शिव त्रिशूल पर बसी नगरिया, महिमा अपरंपार है।

विश्वेश्वर के दर्शन से ही , होता बेड़ा पार है।

गंगा जल से गगरी भरकर, भोले का अभिषेक करें,

बम-बम भोले का उच्चारण, काशी में गुंजार है।

 

प्रलयकाल में नष्ट न होती, ऐसी नगरी काशी की।

माता माता गिरिजा संग विराजे, युग-युग से कैलाशी जी।

आदि-अंत को खोज न पाये, श्री हरि ब्रह्मा जी मिल कर,

ज्योतिर्लिंग सातवां सुपावन, अति व्यापक अविनाशी जी।

– कर्नल प्रवीण शंकर त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश

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