शिव त्रिशूल पर बसी नगरिया, महिमा अपरंपार है।
विश्वेश्वर के दर्शन से ही , होता बेड़ा पार है।
गंगा जल से गगरी भरकर, भोले का अभिषेक करें,
बम-बम भोले का उच्चारण, काशी में गुंजार है।
प्रलयकाल में नष्ट न होती, ऐसी नगरी काशी की।
माता माता गिरिजा संग विराजे, युग-युग से कैलाशी जी।
आदि-अंत को खोज न पाये, श्री हरि ब्रह्मा जी मिल कर,
ज्योतिर्लिंग सातवां सुपावन, अति व्यापक अविनाशी जी।
– कर्नल प्रवीण शंकर त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश