मनोरंजन

मेरे प्रिय – सविता सिंह

नीरव मन में उद्वेलित कुछ वह लम्हें,

खुलने को आतुर अधखुली सी गिरहें,

कुसुमित स्मित मृदु प्रणय के वह सारे पल

दृग पुलिनों में तैरती वो सुहानी सुबहे।

 

सिमटी सहमी हुयी सी संपूर्ण रमनी

धवल चांदनी बिखेरती हुयी यामिनी

वह आहट फिर बढ़ जाना धड़कन

लाजवंती सी सिकुड़ती गई कामिनी।

 

कमनीय काया तो हो गई थी कंचन,

सुधि में मेरे है बसे सारे बीते वह क्षण,

उफ्फ गूंजती हुयी तोप और अमर रहे नारे,

दशक तो हो गये जब टूटे हमारे गठबंधन।

 

दिए थे तुमने मुझे जितने भी रंगीन बसंत,

अमूल्य धरोहर है जीवन की वह मेरे कंत,

स्पंदन,सिहरन,सब जिएगी तेरी बिरहन,

वह सब पल ही तो है मेरे जीवन के पंत।

-सविता सिंह मीरा, जमशेदपुर

 

Related posts

“थाम लेंगे कर तुम्हारे” – अनुराधा पाण्डेय

newsadmin

रक्षा बंधन (बाल कविता) – पूरन चन्द्र शर्मा

newsadmin

प्रमुख लक्की कुमारी द्वारा मुरौल प्रखंड कार्यालय पर हर्षोल्लास से मनाया गया होली मिलन समारोह

newsadmin

Leave a Comment