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डाकघर (लघु कथा) – राजलक्ष्मी श्रीवास्तव

neerajtimes.com – गाँव के बीचों-बीच एक छोटा-सा डाकघर था। वहाँ के डाकिया रामलाल अपने समय और ईमानदारी के लिए प्रसिद्ध थे।

एक दिन उन्हें एक बुज़ुर्ग महिला के नाम पत्र मिला। वे तुरंत पत्र लेकर उसके घर पहुँचे। महिला ने काँपते हाथों से पत्र खोला। वह उसके बेटे का पत्र था, जो कई वर्षों से शहर में नौकरी कर रहा था।

पत्र पढ़ते ही उसकी आँखों में खुशी के आँसू आ गए। बेटे ने लिखा था कि वह जल्द ही घर आने वाला है।

महिला ने रामलाल को धन्यवाद देते हुए कहा, “बेटा, तुमने आज मुझे सबसे बड़ी खुशी दी है।”

रामलाल मुस्कुराए और बोले, “माँजी, यही तो डाकघर का काम है—लोगों के दिलों को जोड़ना।”

शिक्षा: सच्ची सेवा और जिम्मेदारी लोगों के जीवन में खुशियाँ लाती हैं।

– राजलक्ष्मी श्रीवास्तव , छत्तीसगढ़

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