मनोरंजन

ये बारिश का मौसम – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

गिरती बूँदें पैदा करतीं, पड़-पड़ टन-टन का सरगम।
कभी करें उत्पन्न तीव्र ध्वनि, कभी ताल होती मद्धम।
आरोही-अवरोही लय सम, वर्षा धीमी-जोर रे।४
पावस ऋतु जब भी आती है, बादल करते शोर रे।
गर्जन तर्जन रिमझिम रिमझिम, हो वर्षा घनघोर रे।

मोर-मोरनी रह-रह बोलें, प्रतिध्वनि लगती अति प्यारी।
वशीभूत हो कर पावस के, करें मिलन की तैयारी।
व्याकुलता स्वर में लगती है, ज्यों ढूढ़ें चितचोर रे।”
पावस ऋतु जब भी आती है, बादल करते शोर रे।
गर्जन तर्जन रिमझिम रिमझिम, हो वर्षा घनघोर रे।

सूनी सेज देख कर गोरी, नित ठंडी आहें भरती।
पिय की याद सताती दिल को, हूक हृदय में तब उठती।
रात अकेले कटे न काटे, जाने कब हो भोर रे।
पावस ऋतु जब भी आती है, बादल करते शोर रे।
गर्जन तर्जन रिमझिम रिमझिम, हो वर्षा घनघोर रे।
– कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश

Related posts

अद्वितीय व अनूठी प्रतिमा है दिउड़ी माता की (नवरात्रि) – स्वामी गोपाल आनंद बाबा

newsadmin

नई परम्परा (लघु कथा) – डॉ. प्रियंका ‘सौरभ’

newsadmin

गीत – जसवीर सिंह हलधर

newsadmin

Leave a Comment