बस प्यार किया तुमसे,तुमको ही चुना हमने,
करती हूँ इबादत भी सब सौप दिया हमने।
ज़ल़ते हुऐ दीपो के हर ओर शिवाले है,
मंदिर मे तुम्हें देखा,ह़म़राज चुना हमने।
डूबे तेरी आँखो मे,अब यार उतरने को,
ख़ल्वत मे मेरे यारा सब सच को कहा हमने।
कुछ वक्त ग़ुज़ारा था, रह स़ंग तुम्हारे भी,
कितना वो हसी लगता,कुछ सोच चुना हमने।
दिन रात सताते हैं वो बात नही सुनते।
ह़म़राज बनाकर उनको देख लिया हमने।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चंडीगढ़